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Hungama 2 Review

Review:

Hungama 2  शोर-शराबे का है 'राज', शिल्पा की फिल्म से कॉमेडी गायब

Sanjeev Gautam:July 26,2021

Hungama 2 Review: कॉमेडी फिल्मों में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन दिखाना और फिर उससे कॉमेडी जनरेट कर देना, अपनी इस कला से उन्होंने हेरा फेरी और भूल भुलैया जैसी फिल्में दी हैं. अब उस कन्फ्यूजन का नया परिणाम है हंगामा 2....देखनी है या नहीं, हम बताते हैं

फिल्म:हंगामा 2

कलाकार : मीजान जाफरी, शिल्पा शेट्टी, परेश रावल

निर्देशक :प्रियदर्शन



पहले एक गलती...फिर दूसरी गलती...फिर तीसरी गलती और उन सभी गलतियों से खड़ा होता बवाल. फिर उस बवाल पर जमकर होता हंगामा....ये लाइन जितनी कन्फ्यूजिंग लग सकती है, डायरेक्टर प्रियदर्शन का डायरेक्शन भी कुछ ऐसा ही रहा है. कॉमेडी फिल्मों में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन दिखाना और फिर उससे कॉमेडी जनरेट कर देना, अपनी इस कला से उन्होंने हेरा फेरी और भूल भुलैया जैसी फिल्में दी हैं. अब उस कन्फ्यूजन का नया परिणाम है हंगामा 2....देखनी है या नहीं, हम बताते हैं-

कहानी

दो परिवारों में शादी का जश्न चल रहा है. एक अगर काफी अमीर है तो दूसरा अमीर होकर अपने बेटे के निकम्मेपन की वजह से परेशान है. उस बेटे का नाम है आकाश ( मीजान जाफरी). अब शादी कह लीजिए या सौदा, लेकिन आकाश की जिंदगी बदलने वाली है क्योंकि उसके पिता ( आशुतोष राणा) ने अपने दोस्त के घर उसका रिश्ता सेट कर दिया है. अब उम्मीद पूरी रहती है कि शादी की शहनाई जल्द बजेगी लेकिन तभी वाणी ( प्रणिता सुभाष) नाम का बम आकाश की जिंदगी में भूचाल ला देता है. ट्रेलर में ही बता दिया गया था कि ये वाणी, आकाश से प्यार करती है और दावा कर देती है कि वो उसके बच्चे की मां है.



अब वाणी का ये दावा, आकाश का उसे ठुकरना और पिता का अपने बेटे पर ही शक करना, प्रियदर्शन ने इसी कन्फ्यूजन पर अपनी पूरी कहानी बता दी है. शॉट में तो यहीं कहानी है, डिटेल में जानना है तो बस ये समझ लीजिए इन किरदारों के अलावा आकाश के घर में एक कुक (टीकू तलसानिया) भी है, उसकी ऑफिस सेक्रेट्ररी अंजलि ( शिल्पा शेट्टी) भी है और उस अंजलि का एक शकी पति राधे (परेश रावल) है. इन सभी किरदारों का काम कहानी में कन्फ्यूजन बढ़ाने का है. तो अब सवाल आता है कि वाणी जिस बच्चे को आकाश का बता रही है, वो असल में किसका है? कौन झूठ बोल रहा है- आकाश या वाणी? आकाश की होने वाली शादी का क्या होगा? 2 घंटे 36 मिनट निकालने पड़ेंगे, तब ये कन्फ्यूजन क्लियर हो जाएगा.Also Read Toofan Movie Review

कॉमेडी कहां है जनाब?

प्रियदर्शन ने लंबे समय बाद डायरेक्शन में वापसी की है. हंगामा 2 को उन्होंने एक पारिवारिक फिल्म बताया था, ये भी कहा था कि फिल्म में कॉमेडी बिल्कुल साफ-सुथरी रखी गई है. फिल्म देखकर डायरेक्टर की बात बिल्कुल सही लगती है, कुछ भी उटपटांग नहीं दिखाया गया है, बिना सिर पैर की कॉमेडी भी नहीं है. लेकिन मजे की बात ये है कि फिल्म में कॉमेडी भी नहीं है. 2 घंटे 36 मिनट की फिल्म में कोई अगर आपको 10 मिनट हंसा दे, तो उसे कॉमेडी फिल्म नहीं कह सकते. 

एक्टिंग में कितना दम?

एक्टिंग के मामले में कुछ राहत जरूर दिखाई पड़ती है. मीजान की कॉमिक टाइमिंग बढ़िया लगी है. फिल्म कम की है, इसलिए ये नहीं कह सकते कि कोई जॉनी लीवर टाइप का एक्टर मिल गया है, लेकिन शुरुआत बढ़िया है. प्रणिता सुभाष का काम भी सही कहा जाएगा. ये देखकर अच्छा लगा कि डायरेक्टर ने फिल्म में अपनी फीमेल लीड को काफी स्पेस दी है. आधे से ज्यादा कन्फ्यूजन उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमे हैं. इस बार आशुतोष राणा को भी अलग टाइप का रोल मिला है. एक्टिंग तो उनकी अच्छी ही रहती है, लेकिन इस बार उनका किरदार काफी चिल्लम चिल्ली करता है. कह सकते हैं कि प्रियदर्शन की फिल्म है, इसलिए ऐसा हुआ है. लेकिन शायद आशुतोष पर ये ज्यादा सूट नहीं करता.

Movie Trailer👇



प्रियदर्शन का फॉर्मूला पुराना, इस बार फेल कैसे?

लंबे समय बाद वापसी कर रहीं शिल्पा शेट्टी को फिल्म में कई बार आता-जाता दिखाया गया है. लेकिन एक ठोस किरदार की कमी है. मेकर्स ने उन्हें उन्हीं के पुरानी गानों पर डांस जरूर करवाया है, फिल्म के बाद भी वहीं याद रह जाता है. फिल्म में परेश रावल को शिल्पा के पति के तौर पर दिखाया गया है. ये सुनने में जितना अजीब लगता है, देखते समय भी अटपटा दिखाई पड़ता है. कॉमेडी फिल्म जरूर है, लेकिन ये कपल बेमेल सा लगता है. सह कलाकारों में टीकू तलसानिया और राजपाल यादव ने बेहतरीन काम किया है. पूरी फिल्म में जो भी थोड़ा बहुत मजा आता है, उसका क्रेडित इन दोनों को जाएगा.Narappa Movie Review पढ़ने के लिए click करें

हंगामा 2 की डायरेक्शन की बात करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि प्रियदर्शन ने कोई खराब काम नहीं किया है. जो सेट फॉर्मूला 90 के दौर में इस्तेमाल करते थे, उसी को फिर दोहराया है. उनकी हेरा फेरी को देखकर तो आज भी हंसी आ जाती है. लेकिन इस बार शायद कन्फ्यूजिंग फिल्म बनाने के चक्कर में वे खुद ही कन्फ्यूज हो गए. वो असर फिल्म में साफ दिखा क्योंकि कॉमेडी गायब रही और कहानी से कनेक्शन भी टूटता रहा. 

फिल्म में कुछ गाने भी रखे गए हैं. अलग से सुनेंगे तो शायद बढ़िया लगें, लेकिन फिल्म के लिहाज से सटीक नहीं बैठते हैं.  लेकिन कॉमेडी के आभाव में ये सिर्फ एक शोर-शराबे वाली फिल्म रह गई जिसे ना देखने में किसी का कोई नुकसान नहीं होगा.

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